ज्येष्ठा नक्षत्र व साध्य योग में ज्येष्ठ पूर्णिमा आज

माता लक्ष्मी संग श्रीहरि की पूजा एवं स्नान दान की विशेष महत्ता

आज ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा का पर्व ज्येष्ठा नक्षत्र व साध्य योग में मनायी जाएगी। सनातन धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। सभी पूर्णिमा में ज्येष्ठ की पूर्णिमा को खास माना गया है। आज गंगा स्नान करने से पाप, रोग, शोक आदि से मुक्ति मिलती है। भारत के दक्षिणात्य संप्रदाय के श्रद्धालु इसे वट पूर्णिमा के रूप में मनाते है। आज चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली के चंद्र दोष दूर तथा चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है I आज के दिन सत्यनारायण प्रभु की विधिवत पूजा के बाद कथा श्रवण करने से समस्त सांसरिक सुखों की प्राप्ति होती है I

ज्येष्ठ पूर्णिमा की पौराणिक महत्ता

आचार्य राकेश झा ने बताया कि ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को अन्य सभी पूर्णिमाओं से अधिक महत्व रखता है I इस मास में कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाये गए I गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और आज पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है I भविष्य पुराण के अनुसार आज के दिन गंगा, सरोवर, संगम या तीर्थ में स्नान के बाद दान,व्रत व पुण्यकृत्य करने से समस्त पापों का ह्रास तथा मोक्ष की प्राप्ति के द्वार खुल जाते है I आज लक्ष्मी-नारायण की पूजा, खीर का भोग तथा कर्पूर की आरती की जाती है I मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना किया जायेगा I

सफेद वस्तु के दान से सुख-समृद्धि

आज साध्य योग में पूजा-पाठ, दान-धर्म करने से धन, संपत्ति एवं वैभव में वृद्धि होती है I आज चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान जैसे सफेद वस्त्र, शक्कर, चावल, दही, चांदी, सफेद फूल, मोती आदि का दान करने से कुंडली में चंद्रमा प्रबल तथा जीवन में सुख -समृद्धि की वृद्धि होती है I

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